विटामिन ई
विटामिन ई के शरीर में कार्य:- विटामिन ई सभी उम्र के लिये महत्वपूर्ण है क्योकि यह एक एंटीऑक्सीडेट प्रकार का विटामिन है व्यायम खेल कूद से उत्पन्न हो सकने वाली आक्सिकरणीय नुकसान को रोकने में मदद करता है । विटामिन ई द्वारा मुक्त एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण इसे आक्सिकरणीय नुकसान में कोशिकाओं को सामान्य रूप् से कार्यकरने के लिये पूरी झमता के साथ प्ररित करता है और उम्र बढने की प्रक्रिया कैसर और हिदय रोग सहित कई विभिनन स्वास्थ्य स्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिये जिम्मेदार माना जाता है विटामिन ई सभी मासपेशियों में ऐठन को कम करने में मदद कर सकता है ।
विटामिन ई कई रूपों में मौजूद है
अल्फा टोकोफिराल
डी अल्फा टोको फिरोल प्राकृतिक उत्पाद सोयाबीन तेल
डी अल्फा टोको फिरईल
डी एल अल्फा
सिथेटिक विटामिन
प्राकृतिक अल्फा ,बीटा ,डेल्टा और गामा टोको फिरोल सहित समावयवों का एक मिश्रण है
1-कोशिकाए एक दुसरे से इंटरएक्ट करने में विटा0ई का उपयोग करती है ।
2-विटा0ई कोशिका के अस्तित्व बनाये रखने के लिये कोशिका की वाह झिल्ली को बनाये रखता है
3-शरीर के बसिय अम्लों को संतुनल में रखता है
4-समय से पहले हुऐ या अपरिपक्व नवजात शिशु में ई की कमी से खून की कमी हो जाती है इससे उनमें एनिमिया हो सकता है।
5-विटा ई के कमी से नसो या न्युरोलोजीकल्स समस्याये पैदा हो सकती है
6-स्त्रीयों में बांझपन व पुरूषों में नपुसकता का कारण विटामिन ई की कमी है ।
7-शरीर में घॉव व गैगरीन विटा0ई के प्रयोग से समाप्त हो जाती है।
8-विटामिन ई की कमी से स्त्रीयों के स्तन सुकड जाते है और छाती सपाट हो जाती है ।
9-ई की कमी हो जाने से किसी भी रोग का संक्रमण जल्दी होता है ।
10-ई की कमी होने से विटामिन ए भी शरीर से नष्ट होने लगता है ।
11-विटामिन ई झुर्रियों को कम करता है । अर्थात विटामिन ई झुरियों को मिटाने एंव युवा बनाये रखने में विशेष सहायता करता है । विटामिन ई से त्वचा की कई समस्याये जैसे मुंहासे,त्वचा पर झुरूरीया दॉग धब्बे,विटामिन ई त्वचा का मॉईस्चर को बकरार रखता है । यह विटामिन त्वचा के निर्माण में अपनी अहम भूमिका का निर्वाह करता है जब कभी त्वचा अपनी नमी खोने लगे औ डेड स्किन सेल जमा होने लगे तो इस समस्याओं के निदान हेतु विटामिन ई का प्रयोग करना चाहिये । अमेरिका के सिमिन निकबन मेदानी का कहना है कि उम्र बढने के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली में हो रही कमी की पूर्ति विटामिन ई कर सकता है ।
12-विटामिन ई से रक्त में लाल रक्त कणिकाओं को बनाने में का आता है अर्थात इससे रक्त में आर बी सी का निर्माण होता है ।
13-शरीर के अंगों को सामान्य रूप् में बनाये रखने में मदद करता है जैसे कि माॅस पेशिया अन्य उतक
14-यह विटामिन शरीर को आक्सीजन के एक नुकसानदायक रूप् से बचाता है जिसे आक्सीजन रेडिकल्स कहा जाता है ये एटीआक्सिडेंट
14-यह विटामिन शरीर को आक्सीजन के एक नुकसानदायक रूप् से बचाता है जिसे आक्सीजन रेडिकल्स कहा जाता है ये एटीआक्सिडेंट
15-थोडी मात्रा में अतिरिक्त विटामिन ई का सेवन कमजोर हो रही प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करता है और जीवाणुओं से शरीर को सुरक्षा प्रदान करता है यं जीवाणु आम तौर पर निमोनिया के कारण होते है ।
विटामिन ई प्राकृतिक स्त्रोतों से ही लेना चाहिये । विटामिन बी सी पानी में धुलनशील है तथा ये पेशाब के माध्यम से शरीर से बाहर निकल जाते है । विटामिन ए डी ई फेल सॉल्युबल है ये शरीर में रह जाते है
विटामिन ई की उपलब्धता:-विटामिन ई अंकुरित अनाज, बिनोले, बिनोले, एवोकैडो, मेवे ,राजमा, फलैक्स सीड (अलसी), सोयाबीन,लोबिया,ईमली,हरी सब्जी गेहूं तथा चावल के अंकुर में विटामिन ई सबसे अधिक मात्रा में उपलब्ध होता है । सूरज मुखी के बीज टमाटर और आम सहित कई खाद्यय पदार्थ विटामिन ई के अच्छे स्त्रोत है । मूगफली में विटामिन ई प्रर्याप्त मात्रा में होती है मूंगफली में विटामिन ई के औ बी-6 प्रचूर मात्रा में होता है यह आयरन नियामिन,फोलेट,कैल्शियम और जिंक का अच्छा स्त्रोत है ।
ओमेगा-3 फैटस सिर्फ ऑयली मछली जैसे सालमन में पाये जाते है । यह गेहूं के अंकुर तेल से भी प्राप्त होता है । ओमेगा थ्री कोई विटामिन नही है लेकिन यह मानव शरीर के लिये बहुत आवश्यक है । ओमेगा थ्री फैटी एसिड शरीर में एच डी एल ¼high density lipoprotin½ कोलेस्ट्रkWल को बनाये रखता है ।
ओमेगा-3 हडियों में कैल्सियम के स्तर को बढाकर इन्हे मजबूत करता है और जोडों के दर्द को दूर करता है जोडों में र्दद होना गठिया रोग का लक्षण है । अलसी का बीज इसका सबसे अच्छा स्त्रोत है इसके अलावा अखरोट समुद्रिय मच्छलियों में भी ओमेगा-3 प्रयुर मात्रा में पाया जाता है ।
विटामिन ई की कमी से वीर्य निर्बल हो जाता है नपुसकता बांझपन,ऑतों में धाव ,गंजापन,गठिया,पीलिया,मधुमेह तथा लिमर व र्हाट समस्याये उत्पन्न हो सकती है । नजर कमजोर हो जाती है दिखने में समस्याये हो सकती है ।
विटामिन ई के लाभः-
1-एंटीआंक्सीडेटः- विटामिन ई युक्त चीजो के सेवन से शरीर में एंटीआंक्सीडेंट को बढाया जा सकता है लेकिन विटामिन ई के लिये केवल प्राकृतिक स्त्रोतों से ही लिया जाना चाहिये ।
2-लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माणः- विटामिन ई शरीर में खून को बनाने वाली रेड ब्लड सेल्स यानी लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करती है । अगर प्रग्नेसी के दौरान गर्भवती स्त्री विटामिन ई का सेवन नही करती है तो उसके बचचे को एनीमिया यानि खून की कमी की शिकायत रहती है
3-त्वचा निखारः- विटामिन ई त्वचा में कसाब और दमक बनाये रखता है । विटामिन ई बेहद लाभकारी त्वचा के लिये बेहद लाभदायक होता है इसके सेवन से त्वचा पर आई झुर्रिया भी दूर हो सकती है ।
4-थॉयराईड और पिटयूटरी ग्रंथी की कार्यशैली में सहायकः- शरीर में विटामिन ई की कमी का सबसे ज्यादा प्रभाव थांयराईड ग्रंथी और पिटयूटरी गंथी की कार्य क्षमता पर पडता है । इसकी कमी से यह दोनोही ग्रथिया धीमें काम करने लगती है जिससे शरीर में काफी थकान और भारीपन होने लगता है ।
5-सेल मेमब्रेन बनाना:- शरीर में सेल मेमब्रेंन वे परत होतीहै जो ब्लड सेल्स को बनाये रखने के उनके ऊपर चढी होती है ।यदि शरीर में विटामिन ई की कमी हो जाये तो यह परत धीर धीर कमजो पड जाती है और बाद में ब्लड सेल्स के बनने में मदद नही कर पाती जिसके कारण शरीर में खून की कमी हो सकती है !
6- मानसिक तनाव और समस्याओं से बचा सकता है :- शरीर में विटामिन ई की प्रर्याप्त मात्रा होने पर व्यक्ति मानसिक तनाव और समस्याओं से बच सकता है शोध में पता चला है कि विटामिन ई की कमी से कई प्रकार की मानसिक समस्याऐ हो सकती है ।
निर्देशः- सप्लीमेंट के रूप् में विटामिन ई के हाई डोज लेना हानिकारक हो सकता है । शरीर में इसकी अधिकता से इंटरनल ब्लडिग का खतरा पैदा हो जाता है । गर्भवति महिलायें शरीर में विटामिन ई की अधिक मात्रा से बचचे में जन्म दोष भी हो सकता है । इसलिये विटामिन ई के सप्लीमेट बिना डाक्टर की सलाह के नही लेना चाहिये साथ ही वे लोग जिनमें उन लोगों जिनमें विटामिन की कमी हो को भी विटामिन ई का अधिक सेवन नही करना चाहिये ।